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भोपाल: मध्य प्रदेश में बिजली खरीद समझौतों (PPA) की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। अब राज्य में किसी भी नए बिजली खरीद समझौते को अंतिम रूप देने के लिए मध्य प्रदेश कैबिनेट की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। इससे पहले तक इस तरह के समझौतों को मंजूरी देने का अधिकार संबंधित कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के पास होता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत अब सभी प्रस्तावों को कैबिनेट स्तर पर भेजा जाएगा।
कैबिनेट की मंजूरी क्यों बनी जरूरी
मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) के बोर्ड ने यह फैसला लिया है कि भविष्य में होने वाले सभी लंबी और मध्यम अवधि के बिजली खरीद व आपूर्ति समझौतों को सीधे बोर्ड स्तर पर फाइनल नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली राज्य कैबिनेट से औपचारिक हरी झंडी मिलने के बाद ही इन्हें लागू किया जा सकेगा। इस नीतिगत बदलाव के पीछे का मुख्य कारण यह है कि दीर्घकालीन बिजली समझौते राज्य पर सालों-साल के लिए बड़ा वित्तीय बोझ डालते हैं। सरकार का मानना है कि कैबिनेट की निगरानी से यह सुनिश्चित हो सकेगा कि समझौते राज्य के आर्थिक हितों के अनुकूल हों और प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करें।
नई तकनीकों के समन्वय के लिए शासन का परामर्श
इस बदलाव का एक अहम कारण ऊर्जा क्षेत्र में आ रहीं आधुनिक तकनीकें भी हैं। वर्तमान समय में बायोमास, सोलर बैटरी स्टोरेज, पंप हाइड्रो स्टोरेज और न्यूक्लियर एनर्जी जैसे नए और आधुनिक विकल्पों के जरिए बिजली उत्पादन के कई प्रस्ताव सामने आ रहे हैं। इन उभरती हुई तकनीकों के वित्तीय और व्यावहारिक पहलुओं को ठीक से समझने के लिए ऊर्जा विभाग को राज्य शासन और वित्त विभाग के उचित परामर्श की आवश्यकता महसूस हो रही थी, जिसके चलते अब इसे उच्च स्तरीय समीक्षा के दायरे में लाया गया है।
प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की तैयारी
ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई के अनुसार, बोर्ड ने प्रदेश की वर्तमान बिजली उपलब्धता और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए गहन मंथन के बाद यह निर्णय लिया है। इस प्रस्ताव को सबसे पहले ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के सामने प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके बाद मुख्य सचिव के माध्यम से इसे मुख्यमंत्री की अंतिम अनुमति के लिए भेजा जाएगा। वर्तमान में राज्य अपनी जरूरतें सौर, पवन, थर्मल और अन्य पारंपरिक व नवीकरणीय स्रोतों से पूरी कर रहा है, और यह कदम ऊर्जा क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश
वर्तमान में ऊर्जा विभाग और राज्य सरकार लगभग 1,795 छोटे-बड़े और अलग-अलग अवधि के समझौतों के माध्यम से प्रदेश में 26,012 मेगावाट क्षमता के साथ बिना किसी रुकावट के बिजली की आपूर्ति कर रहे हैं। इस क्षमता के कारण मध्य प्रदेश इस समय एक एनर्जी सरप्लस (अतिरिक्त बिजली वाला) राज्य बना हुआ है। सरकार का यह बड़ा फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली की नई दरों को लेकर मंथन चल रहा है और साथ ही 'सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना' जैसी सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।

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